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मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

मन बावला है



मन बावला है, मन बावला है
अनचाही सी डगर क्यों चला है ?
मुझको ख़बर है कि
ख़्वाहिश हुई है
कुछ तो मोहब्बत सी
साज़िश हुई है
कोई है गुम-सुम
ख़्यालों मे ख़ुद के
लगता है चाहत की
बारिश हुई है...
मन बावला है,मन बावला है
अनचाही सी डगर क्यों चला है ?
उसने कहा कुछ
मैंने सुना कुछ
सपने मे उसने
शायद बुना कुछ
फिर भी है गुम-सुम
ख़ुद में ही खोई
मिल के भी मुझसे
क्यों न कहा कुछ??
मन बावला है,मन बावला है
अनचाही सी डगर क्यों चला है ?
अब तो मोहब्बत का
इज़हार कर दो
हो न मोहब्बत तो
इंकार कर दो
सब कुछ पता है
मासूम दिल को
ख़ुद को भी चाहत की
कुछ तो ख़बर दो।।
मन बावला है,मन बावला है
अनचाही सी डगर क्यों चला है ?
-अभिषेक शुक्ल

3 टिप्‍पणियां:

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  3. बहुत ही बढ़िया article है। ........ very nice and with awesome depiction .... Thanks for sharing this!! :)

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