मंगलवार, 30 अगस्त 2016

उन हाथों में बर्तन है .

जिन हाथों में कलम चाहिए उन हाथों में
बर्तन है
कैसे सबका कहना मानूँ दया जगत का
दर्शन है,
कुछ सपने मैंने भी देखे थे पढ़ने और
लिखने के
अब नसीब में मेरे केवल चौका,पोंछा
बर्तन है।
कुछ उम्मीदें दुनिया से हैं कुछ अधिकार
हमें भी दे दो,
सबको तो दुलराते रहते थोड़ा प्यार
हमें भी दे दो ,
मुझे भी पढ़ना अच्छा लगता जो दुनिया
का दर्शन है ,
जिन हाथों में कलम चाहिए उन हाथों में
                                                                         बर्तन है।                                                    -अभिषेक शुक्ल




फोटो क्रेडिट-समन्वय 

2 टिप्‍पणियां:

  1. छ उम्मीदें दुनिया से हैं कुछ अधिकार
    हमें भी दे दो,
    सबको तो दुलराते रहते थोड़ा प्यार
    हमें भी दे दो ,
    मुझे भी पढ़ना अच्छा लगता जो दुनिया
    का दर्शन है ,
    जिन हाथों में कलम चाहिए उन हाथों में
    बर्तन है।
    बहुत सटीक और मन को झकझोर देने वाले बेहतरीन शब्द

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