सोमवार, 20 जून 2016

पापा कितना खुश होते हैं??

जब अखबारों में भूले-भटके नाम
मेरा आ जाता है
जब मेरा कोई लिखा हुआ गीत घर में
मिल जाता है
जब सूरज के जगने से पहले फोन मेरा
घर जाता है
पापा कितना खुश होते हैं??
दिन भर की भाग दौड़ से जब पापा
थक जाते हैं
मुकदमों की माथापच्ची छोड़ घर में
जब आते हैं
जब मम्मी अपने हाथों से चाय
बना कर लाती है
पापा कितना खुश होते हैं?

जब भइया अंग्रेजी में कोई गाना
गाता है
जब पापा के मित्रों को वो कानून
सिखाता है
जब सबको अपने बातों से वो चुप
सा कर देता है
पापा कितना खुश होते हैं?
जब अम्मा मोटर की सीटी सुनकर
बाहर आती है
पापा को सीढ़ी चढ़ते देख मन में
मुस्काती है
जब अम्मा आभार भरे नयनों से
शिवाला तकती है
पापा कितना खुश होते हैं?
जब हम पापा के बालों पे कोई
कलर लगाते हैं
पर पापा धीरे से भगने की कोई
जुगत लगाते हैं
जब हम पापा से रुकने की ज़िद
करने लगते हैं
पापा कितना खुश होते हैं?

मेरा सब कुछ मेरे पापा! मैं पापा का
खेल खिलौना,
दुनिया में सबसे प्यारा है मुझको
पापा का खुश होना।

(लव यू पापा)
-अभिषेक

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (22-06-2016) को ""वर्तमान परिपेक्ष्य में योग की आवश्यकता" (चर्चा अंक-2381) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बच्चों की ख़ुशी में ही पापा की ख़ुशी छुपी रहती हैं
    बहुत प्यारी रचना

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