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रविवार, 20 सितंबर 2015

गरज-गरज घनघोर घटा ने..


गरज गरज घनघोर घटा ने आज बरसने की
ठानी है,
बरसा दे ओ नभ् के ईश्वर जितना तेरे तेरे घर
पानी है,
तू विस्तृत है तो हम सागर बन तेरा आह्वान
करेंगे,
मेघदूत तेरे कलरव का हम हिय से सम्मान
करेंगे।।
-अभिषेक शुक्ल

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (21-09-2015) को "जीना ही होगा" (चर्चा अंक-2105) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत अच्छा प्रयास अभिषेक जी!

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  3. सुन्दर व सार्थक रचना ..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

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  4. जल ही जीवन है. सुंदर प्रस्तुति.

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  5. जल बरसा बिन मौसम ... पर सुन्दर छंद बना है ...

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