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मंगलवार, 12 मई 2015

मेरी चाहत।


अजब सी चाहतें मेरी
अजब सा हाल है मेरा
मोहब्बत के सफ़र में
दिल-बेहाल है मेरा,

न  तुमको   वक़्त है कि
मुझे तुम याद कर पाओ,
मेरे ख्वाबों में बसकर तुम
कहीं मुझमे ही खो जाओ,
पलक झपके तो मेरा अक़्स
तुम्हारी आँख में उभरे
तुम्हारी बिखरी सी ज़ुल्फ़ें
हमारे हाथ से सवरें,
मैं सपने देखूं तुम उनको
ज़रा साकार कर देना,
उलझते रिश्तों को फिर से
नया आकार दे देना,
मोहब्बत की है मुझसे तो
मेरा इतना तो हक़ है ही,
उड़ें जब होश मेरे तो
मेरा उपचार कर देना,
तुम्हारे प्यार में मेरा
ठिकाना बन गया शायद,
मेरे हर ठिकाने पर
तुम अधिकार कर लेना।
(This sketch is made by my dear friend kanika jauhri. I am very thankful to her for this....actually penting is much more adorable than my poem but i tried to write something on the theme of the picture. May be my poem is childish but sketch is not....Thank you kanu...your sketch is awesome, and sorry i failed to write good poem on the theme of the picture.)

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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  2. बहुत ही सुंदर और भावपूर्णं रचना।

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  3. प्रेम में ऐसा सोचना लाजिम है .... नए रिश्ते आप ही बन जाते हैं ...

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  4. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...

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  5. मोहब्बत की है मुझसे तो
    मेरा इतना तो हक़ है ही,
    उड़ें जब होश मेरे तो
    मेरा उपचार कर देना,
    तुम्हारे प्यार में मेरा
    ठिकाना बन गया शायद,
    मेरे हर ठिकाने पर
    तुम अधिकार कर लेना।
    शुरुआत बहुत ही दमदार है और फिर भावनाओं का समुन्दर ! बहुत खूब मित्रवर अभिषेक जी

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  6. क्या बात है वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

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