शनिवार, 6 सितंबर 2014

कशिश!!

'' मेरे ख्यालों से अब निकलो,
        ये दुनिया भी तो खाली है,
है खुशियों का यहाँ मंज़र,
         समझ लो कि दिवाली है,
मेरी अँधेरी दुनिया को
         मेरे ही पास रहने दो,
उम्मीदों कि ये जो लौ है,
         वो अब बुझने वाली है.''

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया
    ..अधेरा है तो उजाला भी है ..
    उम्मीद है तो नाउम्मीद भी है

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  2. वाह ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति

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  3. अवसाद का दर्शन क्यों प्रकृति हवा पेड़ पानी सब कुछ हमारे साथ तादात्म्य बनाये हुए हैं एक वो नहीं तो क्या।

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